सांप की सवारी करने वाले मेढकों की कथा
सांप की सवारी करने वाले मेढकों की कथा काकोलुकियम - पंचतंत्र एक पर्वतों से घिरे प्रदेश में मन्दविष नाम का एक वृद्ध सर्प रहता था। एक दिन वह बैठा - बैठा विचार करने लगा कि ऐसा क्या उपाय किया जाये कि बिना परिश्रम किए ही उसकी आजीविका आराम से चलती रहे। उसके मन में तभी एक विचार प्रकट हुआ। उसके समीप ही मेढकों से भरा तालाब था। वह उस तालाब के पास चला गया। वहां पहुँचकर सर्प बड़ी बेचैनी से तालाब के पास इधर-उधर घूमने लगा। उसे इस प्रकार घूमते हुए तालाब के किनारे एक पत्थर पर बैठा एक मेढक देख रहा था। उस मेढ़क को सर्प को इस तरह देखकर आश्चर्य हुआ तो उसने पूछा। “मामा जी ! आज क्या समस्या है? रात होने वाली है, परन्तु तुम अपने भोजन-पानी की व्यवस्था नहीं कर रहे हो?” सर्प बड़े दुःखी मन से बोलने लगा, “बेटे! क्या करूं, मुझे तो अब बिल्कुल भी भोजन की अभिलाषा ही नहीं रह गई है। आज सुबह - सुबह ही मैं भोजन की तलाश में निकल पड़ा था। तभी एक सरोवर के तट पर मैंने एक मेढक को बैठ...